एमपी के 48 बीजेपी नेता मंत्री नहीं बनाये जाने से, अरमानों पर पानी फेर रही सरकार
भाजपा कई मामलों में पूरी तरह बदल गई है। नेताओं को पहले संघर्ष करना पड़ता है, बाद में पद और प्रतिष्ठा मिलती है। फिलहाल निगम, मंडल, प्राधिकरण, बोर्ड व आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों के साथ यही हो रहा है। पहले इन्हें ढाई से तीन साल नियुक्ति पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, अब अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री और उपाध्यक्ष राज्यमंत्री का दर्जा पाने के लिए तरस रहे हैं। मप्र में ऐसा पहली बार हो रहा है जब अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तो बनाए, लेकिन मंत्री का दर्जा नहीं दिया जा रहा। अंदर खबर है कि कुछ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तो दर्जा नहीं मिलने के कारण नाराज हो गए है। नतीजा, मन लगाकर काम नहीं कर रहे। बीजेपी के करीब 48 ऐसे नेता हैं जोकि मंत्री नहीं बन पाने से मन मसोसकर बैठे हैं।
जयभान सिंह पवैया का कार्यकाल तो कुछ ही महीने बात खत्म हो रहा
अध्यक्ष व उपाध्यक्षों की नियुक्तियां सत्ता व संगठन ने आपसी चर्चा और सहमति के बाद मार्च से जुलाई के बीच में की हैं। इनमें से राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया का कार्यकाल तो कुछ ही महीने बात खत्म हो रहा है।