रेहटी - जाड़े का मौसम आते ही सब्जियों के भाव कम हो जाते हैं। इसलिए जाड़े को सब्जियों का मौसम भी कहा जाता है। इस मौसम में सभी मन भर कर हरी सब्जियां खाते हैं। नवंबर आते ही हर प्रकार की सब्जियों की आमद शुरू हो जाती है। सब्जियां सस्ती हो जाती हैं। 100 रुपए में ही सब्जियों से थैला भर जाता था, लेकिन इस साल स्थिति विपरीत है। केवल एक किलो टमाटर व प्याज खरीदने पर ही सौ रुपए लग रहे है। बाकी सब्जियों के लिए अलग से जेब ढीली करनी पड़ रही है। टमाटर अपनी सुर्खी दिखाते हुए जहां 60 रुपए प्रतिकिलो पर स्थिर है, वहीं प्याज का मूल्य भी लगातार बढ़ते हुए 40 रुपए प्रति कलो तक पहुंच गया है।
किलो की जगह बता रहे पाव का भाव
आज बुधवार के दिन जब नगर एवं ग्रामीण सब्जियां लेने बाजार पहुचे तो व्यापारी किलो की जगह पाव का भाव बता रहे है टमाटर 80 तो प्याज भी 50 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने को बेताब नजर आ रहा है। लोगों का बजट गड़बड़ा गया है। सब्जी दुकानदार भी लोगों को किलो की जगह पाव में भाव बताते हैं, ताकि सुनने में ज्यादा न लगे। दाम बढ़ने के बावजूद फ्रेश टमाटर व प्याज नहीं मिल रहा है। कई दुकानदारों ने प्याज रखना ही बंद कर दिया है। प्याज के बारे में व्यापारी कहते है कि अभी प्याज गिली आ रही है। दिन-प्रतिदिन प्याज का वजन सूखता जाता है। इसलिए जितना कम हो उतना ही माल लाकर बेचने में फायदा है।
हालांकि रेहटी नगर में लगे हॉट में कहीं-कहीं टमाटर 50 रुपए प्रति किलो भी बिक रहा है। शेष हरी सब्जियों के भाव भी चढ़े हुए हैं। ऐसे में लोगों की थालियों से हरी सब्जियां भी गायब होने लगी हैं। कोई भी सब्जी 50 रुपए किलो से कम नहीं बिक रही है।
यहां से आती हैं सब्जियां
रेहटी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा भोपाल होशगाबाद सिहोर के अन्य क्षेत्र से हरी सब्जियां आती हैं। क्षेत्र में गिने चुने ग्रामीण ही सब्जियों की खेती करते हैं। इस वजह से ग्रामीण क्षेत्र से काफी कम मात्रा में सब्जियां बाजार में बिकने आती हैं।ग्रामीण छेत्र से सब्जिया कम मात्रा में आने से सब्जियों में महगाई का असर साफ देखा जा सकता है