महेन्द्र शर्मा वजीरपुर, उपखंड़ क्षेत्र में पक्षियाें के संसार में अब एक और नए पक्षी का आगमन हुआ है। कई सालों के बाद में हरा कबूतर यानि ग्रीन पीजन झुंडाे में देखा गया है। ग्रीन पीजन यानि हरियल कबूतर महाराष्ट्र का राज्य पक्षी है। जिसे ग्रामीण इलाकों में अब पहली बार देखा गया है। ग्रीन पीजन पहली बार झुंड में नजर आया है। मीना बड़ौदा के निवासी पक्षी प्रेमी मुनेश मीना गुरूवार को सुबह 8 बजे अपने घर के मकान की छत पर पक्षियों को दाना डाल रहे थे तभी पास ही पीपल के पेड़ाें पर इन पक्षियाें के झुंड को किलाेल करते हुए देखा गया। पक्षी प्रेमियों ने बताया कि ये परिंदे झुंड में किसी दूसरे इलाके से इस क्षेत्र में आए हैं। यह कबूतर प्रजाति का है और शरीर हरे रंग के, जबकि चोंच लाल रंग की होती है। भारत में इसकी पांच-छह अन्य प्रजातियां अस्तित्व में हैं राजस्थान के जंगलों में इसकी अच्छी खासी तादात है, लेकिन जंगलों से बाहर हरियल पक्षी सिर्फ उस समय बाहर आते हैं। जब वट और पीपल के पेड़ाें में फल आते है। लाल रंग का यह फल फिग फैमिली का है, और हरियल पक्षी का सबसे पसंदीदा फल है। ग्रामीण इलाकों के लोगों का मानना हैं कि इन पक्षियों का आना शुभ माना जाता है। मीना बड़ौदा गांव के वयोवृद्ध शिम्मू साई बताते हैं कि तीन चार दशक पहले जंगल में पीपल,बरगद, बेर के पेड़ भी अधिक रहते थे। जिससे नवंबर से मार्च तक इन पक्षियों की संख्या काफी अधिक देखी जाती थी। इन पक्षियों का आगमन शुभ माना जाता है। पुराने समय में इनके आगमन से अनुमान लगाया जाता था कि फसलों की पैदावार भी काफी अच्छी होगी।
गांवों में दिखने लगे महाराष्ट्र के राज्य पक्षी ये है दुनिया का अनाेखा पक्षी जाे नहीं रखता जमीं पैर