अनिल उपाध्याय खातेगांव खातेगांव तहसील के दूरस्थ ग्रामीण अंचल के हरणगांव के अंतर्गत आने वाले ग्राम गोपालपुर में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन "आत्मा" अंतर्गत किसान संगोष्ठी का आयोजन गुरुवार को किया गया, जिसमे प्राकृतिक (जैविक) खेती पर किसानों को प्रशिक्षण दिया गया, साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित भी किया गया। परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती नीलमसिंह चौहान ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि जीरो बजट प्राकृतिक (जैविक) खेती देसी गाय के गोबर और गोमूत्र पर आधारित हैं प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत का प्रयोग किया जाता है। सरकार द्वारा प्राकृतिक (जैविक) खेती को प्रोत्साहन देने के लिए जिले के चयनित कृषकों को प्रशिक्षण दिया गया व प्राकृतिक खेती पूर्णता रासायनिक उर्वरक कीटनाशक व खरपतवार नाशक से मुक्त है । डॉ बड़ाया ने किसानों को रसायनिक खेती से प्राकृतिक खेती में कैसे काम किया जाना जाए के बारे में किसानो जानकारी दी। डॉ मनीष ने मिट्टी से पौधे को 17 तत्वों की आवश्यकता होती है के बारे में विस्तार से बताया, दीपक राव ने किसानों को जीवामृत बनाने की विधि बताई।जीवामृत को खेत में डालने से मृदा में जीवाणुओं की संख्या में वृद्धि व प्राकृतिक तरीके से पोषक तत्वों में वृद्धि होती हैं। एम.एल सोलंकी ने आजादी का अमृत महोत्सव केम्पन अंतर्गत चतुर्थ फसल बीमा सप्ताह कार्यक्रम अंतर्गत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी दी। कृषक संगोष्ठी के पूर्व जैविक खेती से जुड़े प्रगतिशील किसान संजय मराठा के फार्म हाउस पर टीम एवं किसानों द्वारा जैविक पद्धति से उगाई गई फसलों का निरीक्षण किया गया। जीवामृत बनाने की विधि 10 लीटर गोमूत्र, 10 किलो गोबर, 2 किलो गुड़ 2 किलो बेसन, 2 लीटर छा च, 500 ग्राम पीपल अथवा बड़ के पेड़ के तने की मिट्टी 200 लीटर प्लास्टिक की टंकी 180 लीटर साफ पानी लेकर उपरोक्त सामग्री को घोलना है तथा 7 दिन रखना है,और सात दिन के बाद छिड़काव करना है। धनजीवामृत बनाने की सामग्री एव विधि 100 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन, 500 ग्राम बड़ या पीपल के तने की मिट्टी को लेकर पहले गोबर को फैला लें और गोबर के लड्डू बना ले और टाट के बैग में लड्डूओं को भर लें और सात दिन सुखाना है । इसके बाद सात से 10 क्विंटल देशी खाद में लड्डूओं को मिलाकर खेत में नमी होने पर फेकना है। अमृत पानी बनाने की विधि 10 किलो गाय का गोबर, 250 ग्राम गाय का घी, 500 ग्राम शहद लेना है। पहले गाय के गोबर में घी का मिश्रण करना है फिर शहद का मिश्रण कर 200 लीटर पानी में मिलाकर खेत में छिड़काव करना है जिससे जीवाणुओं की संख्या बढ़ेगी। खोज सामाजिक संस्था के श्याम रानोजा,जहूर मंसूरी व कमल चौहान ने भी कृषक संगोष्ठी एवं प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण में भाग लिया। संस्था प्रतिनिधियों ने बताया कि हमारी संस्था द्वारा क्षेत्र के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कार्यक्रम में परियोजना संचालक आत्मा श्रीमती नीलमसिंह चौहान, उप परियोजना संचालक आत्मा एम.एल. सोलंकी,ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर, श्याम लाठी,कृषि विज्ञान केंद्र देवास से डॉ ए.के बडाया,डॉ मनीष सिंह,दीप ज्योति किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड प्राकृतिक कृषि के शिक्षक दीपक राव,ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी कैलाश यादव,सहायक तकनीकी प्रबंधक आत्मा सुनील जाट, मुकेश मालवीय तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। फोटो