( सतीश यादव ) राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ शहर चारो तरफ से हरिभरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है । प्रदूषण मुक्त स्वच्छ हवा और मदमस्त हरियाली से ओतप्रोत नगर नरसिंहगढ़ सैलानियों को अपनी और खींचा ले आता है। बारिश के समय यहां के पहाड़ियों से कल-कल करते झरने इस नगर की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं । पहाड़ियों की चोटियों पर विराजमान आदिदेव महादेव के शिवालय और अन्य अलौकिक देव स्थल नगर में आध्यात्मिक ऊर्जा और शक्ति का स्त्रोत है । नरसिंहगढ़ शहर में नरसिंह भगवान का मंदिर भी अपने आप में विशिष्ट है क्योंकि नरसिंह भगवान की अष्ट धातु की प्रतिमा का एक मंदिर नरसिंहगढ़ में हे और दूसरा नेपाल में ।बड़े महादेव के समीप पहाड़ियों के बीच हिंगलाज माता मंदिर एवं करणी माता मंदिर हैं। देश में करनी माता का दूसरा मंदिर राजस्थान हे और हिंगलाज माता का दूसरा मंदिर पाकिस्तान में है। नगर में कई मंदिर है जो अपनी ही एक अलग पहचान और गौरवशाली वृत्तांत रखते हैं। नगर की प्राचीन बावडिया, तालाब के बीच पशुपतिनाथ का मंदिर, चोपड़े, पहाड़ियों पर आश्चर्य जनक चट्टाने आदि देखते ही बनती है। नरसिंहगढ़ की पहाड़ियां शैल चित्रों से भरी पड़ी हैं जिन्हे पुरातन विभाग के सामने स्वर्गीय श्री डॉ जितेंद्र दात त्रिपाठी जी के प्रयासों से लाया गया । नरसिंहगढ़ की पवित्र भूमि पर वीर बलिदानी और आजादी के दीवाने महाराज चैन सिंह ,हिम्मत खा और बहादुर खा जैसे बहादुरों ने जन्म लिया है । नरसिंहगढ़ में कई ऐतिहासिक स्थान है । नरसिंहगढ़ का किला जो अपने गौरवशाली वैभव की कहानी आज भी बयां करता है । नरसिंहगढ़ से 15 किलोमीटर दूर कोटारा में माता मंदिर,करोटिया सुरंग, हाजी अली दरगाह , सोला खंभ, शाका श्याम जी का प्राचीन मंदिर आदि आश्चर्य और कला के बेजोड़ साक्ष्य है ।नरसिंहगढ़ का वन अभ्यारण अपनी एक अलग ही पहचान रखता है । यहा वर्षभर वन जीव प्रेमियों का जमावड़ा रहता है।विलुप्त होते गिद्धों का भी यहां कई स्थलों पर जमावड़ा नजर आता है। नगर वासियों का रहन-सहन आपसी भाईचारा एक दूसरे का मान सम्मान करना आदर भाव एक मिसाल है। स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग की अनदेखी के कारण कुछ ऐतिहासिक धरोहर तो अपनी पहचान खो चुकी है और कुछ अपनी अंतिम सांस गिन रही है । नगरवासी काफी समय से प्रशासन से नरसिंहगढ़ नगर को पर्यटक स्थल की मान्यता दिलाने के लिए मांग करते चले आ रहे है। नगर वासियों का मानना है कि अगर यह नगर पर्यटक स्थल घोषित हो जाता है तो यहां के लोगों को रोजगार मिलने की बहुत संभावनाएं बढ़ जाएगी मगर नगर वासियों की मांग पर शासन प्रशासन द्वारा आश्वासन ही मिलते हैं । नरसिंहगढ़ नगर में वह सब खूबियां है जो पर्यटक स्थल के लिए होनी चाहिए ऐसी कई मनोरम और अद्भुत खूबियों के बाद भी इसे पर्यटक स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। नरसिंहगढ़ में पर्यटन की संभावना को देखते हुए *तहसीलदार पीसी पांडे* ने कहा कि नरसिंहगढ़ नगर अपने आप में कई खूबियां समेटे हुए हैं इसे पर्यटक स्थल घोषित होने की पूरी संभावना है यहां कई प्राचीन मंदिर एवं इमारतें हैं जल मंदिर ,बड़ा महादेव , नादिया पानी हनुमानगढ़ी प्राचीन मंदिर, कोटरा माता का मंदिर, कोटरा की गुफाओं के शैल चित साका श्याम जी का प्राचीन मंदिर नरसिंहगढ़ का प्राचीन किला आदि आकर्षण का केंद्र हाल ही यहां पर वेब सीरीज फिल्म का निर्माण हुआ प्रशासनिक स्तर पर सैलानियों किसी सुविधाओं के लिए कई प्रयास किए जा पूर्व में तत्कालीनएसडीएम अमन वैष्णव छोटे तालाब में बड़े तलाव पर्यटकों को जल शहर करने के लिए तालाब में बोट डलवाए गए थे रोपवे का काम प्रस्तावित हैं निश्चित ही नरसिंहगढ़ पर्यटन केंद्र घोषित होगा ,,,,