महेन्द्र शर्मा, वजीरपुर, उपखंड़ सहित आस पास के ग्रामीण इलाकों में सर्दी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए है। मौसम में चल रही सर्द हवाएं लोगों की धूजणी छूडा़ रही। वही सुबह के समय काफी देर तक कोहरा छाया हुआ रहता है। सर्दी का आलम यह है कि लोग जल्दी ही अपने काम में को निपटा कर घरों की ओर रवाना हो जाते है। कड़ाके की सर्दी ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर रखी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ जगह पर पाला पड़ने की भी जानकारी मिली है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 18 डिग्री और न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया वहीं 1 दिन पूर्व गुरुवार को अधिकतम तापमान 19 डिग्री और न्यूनतम 4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था पाला गिरने से सरसों की फसल में नुकसान देखने को मिल रहा है। वजीरपुर उपखंड़ क्षेत्र में पिछले 2 दिनों से पाला गिरने से सरसों की फसल में नुकसान हो रहा है उपखंड क्षेत्र के मीणा बड़ौदा,बड़ौली खेड़ला कुसाय, रायपुर, मेंडी फुलवाडा़ सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 10 से ज्यादा खेतों में सुबह पाला पड़े होने की स्थिति देखने को मिली जिससे किसानों को नुकसान होने के आसार नजर आ रहे हैं । क्षेत्र के किसान मुनेश मीना,सजय शर्मा, दरबसिंह मीणा गजेंद्र कुमार मीणा आदि ने बताया कि शुक्रवार अलसुबह जब किसानों ने अपने खेतों में सरसों की फसल को देखा तो फसल के ऊपर ओस की बूंदे जमी हुई नजर आई जिसके चलते सरसों की फसल पर पाला पड़ने से सरसों की अगेती फसल में नुकसान है। सरसों के खेतों में रात को पाला गिरने से सरसों पर बर्फ की चादर दिखी वहीं ग्रामीण इलाकों में 3-4 दिन से पड़ रही कड़ाके की सर्दी व शीत लहर पाले की मार से सरसों चना सहित सभी फसलो में नुकसान होने की चिंता सताने लगी हैं। ठंडी शीत लहर व कोहरे एवं वादल छाए रहने से सरसों की फसल में नुकसान होने की आशंका से किसानों के चेहरों पर निराशा झलकने लगी है। सिंचाई के लिए पानी के अभाव के चलते क्षेत्र के ज्यादार किसानों ने अब की बार सरसों की फसल बोयी है। किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद की थी, लेकिन विगत दिनों से चल रही शीतलहर सेे उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसानों ने बताया कि महंगे दामों में बीज खरीद कर फसलों की बुवाई की थी, गौरतलब है कि खरीफ के सीजन में फड़का के प्रकोप से बाजरा व ज्वार की फसल में भारी नुकसान हुआ था। ऐसे में किसानों को रबी की फसल से आस बंधी थी। सर्दी के जोर पकडऩे से व शीत लहर चलने के साथ ही जमीन में ओस की बूंदो एवं वादल छाए रहने से खेतों में नमी बनी हुई है जिसके चलते सरसों की फसल में सफेद रोली और चैपा का रोग का प्रकोप भी बढने लगा है जिसके चलते किसानों को सरसों की फसल में पैदावार घटने की आशंका है।