उमरिया । पत्रकारिता दम्भ भरने के लिए नहीं, बल्कि आत्म गौरव को बनाये रखने के लिए करें। हिन्दुस्तान में क्षेत्रीय पत्रकारिता ही पत्रकारिता की आत्मा है। दुनिया को हिला देने वाली भोपाल गैस त्रासदी का तीन माह पूर्व अनुमान साप्ताहिक अखबार के राजकुमार केशवानी ने छापा था तब बड़ी बड़ी मीडिया उसे तवज्जो नहीं दिया था लेकिन घटना घटित होने के बाद उस खबर का असर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखा। यह बात माखनलाल चतुर्वेदी संस्थान के समन्वयक, स्तंभकार श्री जयराम शुक्ला ने जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थानीय रणविजय प्रताप सिंह महाविद्यालय सभागार में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में कही। इस अवसर पर मारूति एक्सप्रेस सतना के संपादक राजेश द्विवेदी, लक्ष्मी शंकर उपाध्याय, मेंहदी हसन, संतोष द्विवेदी, अरूण त्रिपाठी, महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉं. एम.एन. स्वामी, अशोक सोनी, रमाशंकर उपाध्याय, संजय शर्मा, उमेश राय, इनायत सिद्दीकी, सुनील कुमार सोनी, राहुल सिंह, चंद्रकांत दुबे, सुरेन्द्र त्रिपाठी, संजय तिवारी, साहिद खान, राजा तिवारी, के.के. शुक्ला , कृष्ण कुमार खटिक, ए.पी. सी. सुशील मिश्रा सहित अन्य पत्रकारगण उपस्थित रहे। मीडिया संवाद कार्यक्रम में जयराम शुक्ला ने खबर जनरेट कैसे होती है, को बताते हुए कहा कि पत्रकार तथ्य सहित खबरों को प्रकाशित करने में प्राथमिकता दें, सिर्फ सुनी सुनाई या दिये गये कमेन्टस पर खबर न छापें। खबर का असर समाज पर पड़ता है, इसलिए इसकी विश्वनीयता कायम रहे, तो निश्चित रूप से कलमकार का सम्मान बढ़ेगा। दिल्ली या भोपाल में बैठकर पत्रकारिता उतनी सशक्त नहीं कर सकते, जितनी कि क्षेत्रीय स्तर पर बैठे पत्रकार कर सकते हैं। पत्रकार खबर को सूंघता है, ऐसी दृष्टि खोजे कि क्षेत्रीय स्तर की खबर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से लिया जा सके। उन्होंने उदाहरण दिया कि कुत्ता आदमी को काटा यह खबर नहीं है, लेकिन आदमी ने कुत्ते को काटा यह बड़ी खबर है। आपने कहा कि अभिव्यक्ति के संबंध में प्रशिक्षण होना चाहिए, अध्ययन एवं दृष्टि से पत्रकारिता को संबल मिलता है। श्री शुक्ला ने कहा कि अंचल की पत्रकारिता करते हुए विदेश की पत्रकारिता पर भी नजर रखने की जरूरत है। खबर के लिए नरक भी जाना पड़े तो सहर्ष तैयार रहें, तत्काल की सूचनाओं से जुड़ें, लेकिन सोशल मीडिया के माध्यम से जो अफवाहे परोसी जा रही हैं, उसके सत्य पर जाने की जरूरत है। पत्रकार को खबर के मान से किसी चीज पर शंका करना उसका गुण है, तभी वह सत्य एवं असत्य खबरों की तलाश बखूबी से कर सकता है। श्री शुक्ला ने कहा कि खबर का खंडन नहीं करना पड़े, यह उसकी सच्ची खबरों पर ही संभव है। पत्रकार को प्राकृतिक न्याय नहीं भूलना चाहिए, चोर को चोर तब तक नहीं कहा जा सकता जब तक अदालत उसे चोर न ठहराये। पत्रकारिता के चरित्र के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। पत्रकार शब्द संविधान में परिभाषित नहीं है, फिर भी कलमकारों क ी लेखनी अपना स्थान बनाये हुए है। आपने कहा कि आजादी के पूर्व पत्रकारिता एक मिशन के रूप में थी लेकिन आजादी के बाद यह पंूजीपतियों के हाथ में खिलौना बनती जा रही है। इस अवसर पर मारूति एक्सप्रेस सतना के संपादक राजेश द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता चुनौती के रूप में है, कस्वाई एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वतंत्र लेखन निश्चित रूप से अंचल के लोगों को नयी दिशा देता है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ पत्रकार नवीन तकनीकी की ओर कदम बढ़ायें और पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनाये रखने में अपनी विश्वनीयता कायम करें। क्षेत्रीय पत्रकारिता आत्मगौरव प्रदान करती है, निचले स्तर से उठने वाले मुद्दे कई बार राष्ट्रीय बन जाते हैं और उससे अच्छी बातें निकल कर आती हैं जिससे समाज को एक नई सीख मिलती है। इलैक्ट्रानिक मीडिया के बढ़ते हुये प्रभाव के बावजूद प्रिंट मीडिया अभी भी अपना स्थान बनाये हुये है उसमें क्षेत्रीय पत्रकारिता का महत्वपूर्ण योगदान है। कार्यक्रम में संतोष द्विवेदी आत्म अनुशासन एवं संयम के तहत पत्रकार इस व्यवसाय में रहें। भौतिकवादी युग में मीडिया में पूंजी का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है। मीडिया कलमकार के हाथ में ही सुरक्षित रह सकती है। प्रोफेशनल एवं पूंजीपतियों के हाथ में पत्रकारिता का जाना कलमकारों के नैतिक मूल्यों पर कुठाराघात है। कलमकार मालिकान के प्रति प्रतिबद्ध हो चुका है, वह अपनी अभिव्यक्ति एवं विचार रखने में सक्षम नहीं हो पा रहा है। इस दौरान लक्ष्मी शंकर उपाध्याय, अरूण त्रिपाठी ने भी पत्रकारिता के आयामों पर प्रकाश डाला वहीं पत्रकारों ने भी स्तंभ कार श्री जयराम शुक्ला से पत्रकारिता के क्षेत्र में कई सवाल किये, जिसका तथ्य परख उत्तर देकर उन्हें संतुष्ट किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सीएल पटेल सहायक संचालक जनसंपर्क ने मीडिया संवाद कार्यक्रम के उद्धेश्यों पर प्रकाश डालते हुए अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती के शैल्य चित्र पर द्वीप प्रज्जवलन के साथ हुई। कार्यक्रम का सफल संचालन एपीसी सुशील मिश्रा ने किया।