धार | 09-मार्च-2017 विधायक मनावर श्रीमती रंजना बघेल ने बताया कि म.प्र. के निमाड-मालवा क्षेत्र में होलिका दहन के एक सप्ताह पूर्व ग्रामों में पारम्परिक ऐतिहासिक हाट-बाजार वाले मेले लगते है, जहॉं आदिवासी समाज के लोग बुढ़े-बच्चे-युवक-युवतियॉं पारम्परिक वेशभूषा में गहने पहनकर झुंड/टोली के साथ अपना पारंपरिक वाद्य ढोल-मांदल लेकर आते है व अपने ही समूह में अपनी लोक संस्कृति का इजहार कर नृत्य करते है। इस दिन होलिका पूजन की आवश्यक सामग्री एवं खाद्य सामग्री को खरीदते है। विधायक श्रीमती बघेल ने बताया कि दैनिक समाचार पत्रों एवं संचार के अन्य माध्यमों, मीडिया से ‘‘भगोरिया पर्व’’ के स्थान पर ‘‘भोगर्या उत्सव हाट’’ शब्द का उपयोग करने के लिए कहा गया है। उन्होने बताया कि वास्तविक शब्द ‘‘भोगर्या उत्सव पर्व’’ ही प्रचलन में लाया जावे। उन्होने यह भी बताया कि यह प्रणय पर्व नही है, इसलिए ‘‘प्रणय पर्व’’ शब्द को विलोपित किया जाए। इस हेतु केन्द्र सरकार एवं राज्य के संस्कृति व जनसंपर्क विभाग को पत्र भेजा गया है।
‘धार भगोरिया पर्व’’ के स्थान पर ‘‘भोगर्या उत्सव हाट’’ शब्द उपयोग हो