अनुसूचित जाति तथा जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर श्री अविनाश लवानिया ने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण सुनिश्चित करायें। दर्ज प्रकरणों की पुलिस अधिकारी समय अवधि में विवेचना करके प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत करें। पीड़ितो को तत्परता से राहत राशि उपलब्ध करायें। उनके समुचित पुनर्वास के प्रयास करें। अधिनियम के तहत दर्ज कोई भी प्रकरण लंबे समय तक लंबित नहीं रहना चाहिए। कलेक्टर ने अधिनियम के तहत गठित खंड स्तरीय समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित न होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होने सोहागपुर को छोडकर शेष सभी एसडीएम को समय सीमा में बैठक आयोजित न करने पर नोटिस देने के निर्देश दिये। उन्होने 7 दिवस में अनिवार्य रूप से बैठक आयोजित करने के निर्देश दिये।

    बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री अरविन्द सक्सेना ने कहा कि अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों की विवेचना तत्परता से की जा रही है। वर्तमान में 23 प्रकरण विवेचना के लिये लंबित हैं। इस संबंध में अनुविभागीय पुलिस अधिकारियों को समुचित कार्यवाही के निर्देश दिये गये है। प्रकरणों में गवाही के लिये आने वाले पक्षकारों को नियमित रूप से शासन के मापदण्डो के अनुसार राशि दी जा रही है। अच्छी विवेचना तथा पैरवी के कारण दर्ज प्रकरणों मे से 22 प्रतिशत मामलों में दोषियों को न्यायालय से सजा दिलाने में सफलता मिली है।

    बैठक में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्रीमती चन्द्रकांता सिंह ने बताया कि अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत एक भी प्रकरण कार्यवाही के लिये लंबित नहीं है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 31 अगस्त तक दर्ज 110 प्रकरणों में 60 लाख 45 हजार रूपये की राहत राशि पीड़ितो को प्रदान की गई है। अनुसूचित जाति के 82 पीड़ितो को 42 लाख 36 हजार 250 रूपये तथा अनुसूचित जनजाति के 28 पीड़ितो को 18 लाख 8 हजार 750 रूपये की राहत राशि प्रदान की गई है। बैठक में सहायक कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखेड़े, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शशांक गर्ग तथा समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।