रेलवे: रेलवे कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि यात्रियों का सामान चोरी होने पर रेलवे को दोषी नही ठहराया जा सकता है। यात्री अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करे। इसका सीधा सीधा मतलब है कि ट्रेनों में चोरी डकैती करने वाले अपराधी अब बेखौफ चोरी डकैती को अंजाम दे सकते है। रेलवे पीड़ित को कोई मुवावजा नही देगा। अब रेलवे को ट्रेनों में से सभी सोने वाली सीट निकाल देनी होंगी। सीट होगी तो लोगों को नींद आएगी। लोग सोएंगे, तो चोरी तो होगी ही। अब यात्री कन्फर्म सीट होने के बाद भी सो नही सकेंगे। यात्रियों के नींद में आने का मतलब है सामान गायब। रेलवे अपने स्टेशन परिसर में चोरी को रोकने में नाकाम रही है और अब चोरों को खुली छूट। रेलवे का यह नियम यात्रियों को भगाने के लिए है क्या? क्यों कोई यात्री टिकट भी लेगा और अपना सामान भी गवायेगा? रेलवे ने GRP और RPF की भर्ती क्यों कर रखी है? अब रेलवे को इसका जवाब देना चाहिए। जब यात्री, यात्रियों का सामान ही सुरक्षित नही रहेगा तो फिर GRP, RPF क्या यात्रियों और वेंडरों से अवैध वसूली के लिए रेल परिसर में रहेंगे? रेलवे को जवाब देना चाहिए।
रेलवे कोर्ट ने अप्रत्यक्ष कहा- चोरी डकैती को खुली छूट है ट्रेनों में, यात्री स्वयं अपने सामान की रक्षा करें।