सीतामढ़ी जिला मुख्यालय से सटे भासर धरमपुर गांव के राजकिशोर गोसाई के पास न तो अपार संपत्ति है और न ही शिक्षा, लेकिन सोच दूरगामी है। उन्होंने गांव में स्कूल को जीवंत रखने के लिए घर की ढाई कट्ठा (दस डिसमिल) जमीन दान में दे दी। इस भूमि पर उत्क्रमित मध्य विद्यालय संचालित है, जहां करीब चार सौ बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। राजकिशोर दोनों पैर से लाचार हैं। स्कूल को जमीन देने के बाद आजीविका चलाने के लिए खुद फुटपाथ पर लटकेना बेच रहे हैं। राजकिशोर गोसाई के दो पुत्र हैं, लेकिन दोनों मंदबुद्धि और शारीरिक रूप से कमजोर हैं। इस काबिल नहीं हैं कि अर्थोपार्जन कर सकें। हालांकि दोनों बहू मदद कर रही हैं। 50 वर्षीय राजकिशोर बताते हैं कि गांव के बच्चों को स्कूल जाते देख सुकून मिलता है। कहते हैं कि उनके पास करीब दस कट्ठा जमीन थी। पांच कट्ठा जमीन इलाज के लिए बेच दी। ढाई कट्ठा जमीन बेटों के हिस्से में छोड़ दी और ढाई कट्ठा जमीन स्कूल के लिए दान में दे दी।
एक अशिक्षित गरीब इंसान बना समाज के लिए मिसाल